वीणा कैसेट के मालिक केसी मालू का सोमवार देर रात डेढ़ बजे हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनका आज शाम साढ़े 4 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम यात्रा शांति पथ मालू हाउस पार्श्वनाथ कॉलोनी निर्माण नगर स्थित घर से पुरानी चुंगी मोक्ष धाम जाएगी।
1946 में चूरू के सुजानगढ़ में जन्मे केसी मालू ने अपना पूरा जीवन राजस्थानी भाषा, लोकसंगीत और लोक कलाकारों को समर्पित किया। वीणा कैसेट्स के माध्यम से उन्होंने हजारों लोकगीत, भजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को रिकॉर्ड कर देश-विदेश तक पहुंचाया और अनेक नए कलाकारों को मंच दिया।
वे राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के आंदोलन से भी लंबे समय तक जुड़े रहे। वर्ष 1987 में राजस्थान के भीषण अकाल के दौरान उन्होंने जयपुर में ऐतिहासिक ‘लता मंगेशकर नाइट’ का आयोजन कर राहत कार्यों के लिए करीब 1 करोड़ रुपए जुटाए थे।कला और संस्कृति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें समग्र कला साधना अवॉर्ड, डागर घराना अवॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया।
राजस्थानी संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए राजस्थान सरकार ने उन्हें ‘राजस्थान रत्न अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके दशकों लंबे सांस्कृतिक योगदान और लोककला के संरक्षण के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण माना जाता है।उनके निधन पर ग्रैमी विजेता विश्वमोहन भट्ट, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समेत कला, साहित्य और सामाजिक जगत की कई हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्हें राजस्थानी लोकसंगीत को वैश्विक पहचान दिलाने वाले अग्रदूत के रूप में याद किया जा रहा है।
ग्रेमी अवॉर्ड विनर विश्वमोहन भट्ट ने कहा कि लोक संगीत के महान संरक्षक का यों अचानक चले जाना व्यथित कर गया है। लोक संगीत के उनके योगदान को कोई नहीं भूल पाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले सप्ताह ही निवास पर उनसे मुलाकात हुई थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन संगीत जगत को समर्पित किया। उन्होंने देश-दुनिया में राजस्थानी गानों को नई पहचान दिलाई थी। उनका निधन हम सभी के लिए एक बड़ी क्षति है। केसी मालू ने बताया था कि स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने पूरे जीवनकाल में जयपुर में सिर्फ एक बार प्रोग्राम किया। 26 नवंबर 1987 को यह आयोजन हुआ था। तब राजस्थान में अकाल पड़ा था। ऐसे में अकाल पीड़ितों के लिए फंड जुटाने के लिए लताजी ने बिना फीस लिए प्रोग्राम किया था। वह अपनी टीम के साथ 4 दिन जयपुर रहीं।
इस दौरान उन्होंने राजस्थानी में ही बात की और राजस्थानी खाना ही खाया। आयोजन हमारी संस्था सुरसंगम संस्थान ने ही आयोजित किया था, इसलिए एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करते हुए मैंने कहा- ‘धन्यभाग राजस्थान रा ज्यो थे पधारया’। वह तपाक से बोलीं- ‘अत्ता दिन थे बुलाया ही कोनी।’ यहां पहुंचकर उनका राजस्थान प्रेम देखकर मैं भी दंग था। प्रोग्राम एसएमएस स्टेडियम में था। पहले दिन उन्होंने आंखों पर पट्टी बांधकर रिहर्सल की। चौथे दिन प्रोग्राम शाम 6 बजे शुरू हुआ। लताजी आमतौर पर 20 से ज्यादा गाने नहीं गाती थीं, लेकिन जयपुर का उत्साह देखकर उन्होंने रिकॉर्ड 26 गाने गाए। वह भी बैक-टू-बैक।
इसमें उनका मशहूर गीत ‘आएगा आने वाला’ भी शामिल था। इस गीत में राजस्थान के संगीतकार खेमचंद्र प्रकाश ने उन्हें ब्रेक दिया था। उन्होंने मंच पर खेमचंद्र को याद भी किया। 39 साल पहले भी आयोजन से 1.01 करोड़ का फंड जमा हुआ था।
इसका चेक लताजी ने तत्कालीन सीएम हरिदेव जोशी को सौंपा। खुद सीएम भी टिकट लेकर प्रोगाम देखने पहुंचे थे। लताजी के अलावा प्रोग्राम में मोहम्मद अजीज, नितिन मुकेश और उषा मंगेशकर ने भी गीत गाए।विधायक गोपाल शर्मा ने कहा कि बिना किसी सरकारी सहायता के मालू जी का जीवन लोक सेवा और कला साधना का अद्वितीय उदाहरण रहा है। उन्होंने राजस्थानी विवाह गीतों पर एक ऐतिहासिक शोध कार्य किया। उनके द्वारा रचित 221 राजस्थानी विवाह गीतों के 2 विशाल ग्रंथ संस्कृति की अनमोल धरोहर हैं।
हिंदी, अंग्रेजी और राजस्थानी—इन तीन भाषाओं में सचित्र तैयार किया गया यह संकलन विश्वभर में विवाह गीतों का सबसे बड़ा संकलन माना जाता है। इसके साथ ही इन गीतों की 24 ऑडियो-वीडियो सीडी भी जारी की गईं, जिसने इस परंपरा को डिजिटल रूप में हमेशा के लिए अमर कर दिया।
उन्होंने 5,000 से अधिक राजस्थानी लोकगीतों की पांडुलिपि और ध्वनिलिपि तैयार कर उनकी ऑडियो रिकॉर्डिंग की, जो आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी। ‘घूमर’, ‘चीरमी’ और ‘कांगसियो’ जैसे कई कालजयी और सदाबहार राजस्थानी गीतों के एल्बम प्रोड्यूस कर उन्होंने लोक धुनों को हर दिल की धड़कन बनाया।
मालू जी ने स्वदेशी संगीत को समर्पित श्रेष्ठ संस्था ‘सुर-संगम’ और राजस्थान लोक संगीत के सबसे प्रतिष्ठित समूह ‘वीणा म्यूजिक’ की स्थापना कर नए कलाकारों को मंच दिया। उन्होंने महान संगीतकार नौशाद साहब के साथ मिलकर देश के जाने-माने कलाकारों के माध्यम से राजस्थानी लोक संगीत को शिखर पर पहुंचाने का ऐतिहासिक कार्य किया।
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