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प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में श्मशानों की जमीनों और उन तक पहुंचने के लिए अब रास्ते बनाए जाएंगे, वहीं श्मशानों की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होगी। कई जगह श्मशानों की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने से विवाद होते हैं।

सरकार ने इन विवादों को खत्म करने का फैसला किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे ग्रामीण सेवा शिविरों में श्मशान की जमीनों को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। साथ ही श्मशानों तक पहुंचने के लिए रास्ते खुलवाए जाएंगे। इसको लेकर राजस्व विभाग ने सभी कलेक्टर्स को चिट्ठी लिखकर श्मशानों की जमीनों का रिकॉर्ड सुधारकर उन तक पहुंचने केच लिए रास्ते बनाने के आदेश दिए हैं।

राजस्व विभाग की चिट्ठी के अनुसार प्रदेश के कई गांवों में श्मशान चालू हैं, लेकिन श्मशान की जमीन राजस्व रिकॉर्ड (जमाबंदी) में दर्ज नहीं है। कई जगहों पर श्मशान की जमीन का कानूनी रूप से आरक्षण नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कामों में सामाजिक असुविधा, अतिक्रमण और जमीन विवाद जैसे मामले सामने आते हैं।श्मशान की जमीनों से जुड़े विवादों को ग्रामीण सेवा शिविरों में सुलझाया जाएगा। जिन श्मशानों की जमीन का सरकारी रिकॉर्ड में जिक्र नहीं है, उन श्मशानों की जमीन को सरकारी जमाबंदी में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। गांवों में श्मशान की जमीनों का भौतिक सत्यापन करते हुए सीमांकन करना होगा। श्मशानों से अतिक्रमण हटाने होंगे। श्मशान की जमीन का नाप जोख कर सरकारी जमाबंदी में रिकॉर्ड दर्ज करना होगा। राजस्व विभाग ने श्मशानों तक रास्ते खुलवाकर उन्हें पंचायतों के सुपुर्द करने के आदेश दिए हैं।

नए श्मशानों के लिए जमीन आवंटित होगी

राजस्व विभाग ने कलेक्टरों को गांवों में श्मशानों के लिए जमीन आरक्षित करने को कहा है। जहां श्मशान के लिए जमीन की आवश्यकता है वहां जमीन आरक्षित कर श्मशान के लिए आवंटित की जाएगी। यह काम आगे भी जारी रखने को कहा है।

दाह संस्कार को लेकर होते हैं विवाद

ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशानों तक पहुंचने के रास्ते नहीं होने के कारण कई बार विवाद होते हैं, इन विवादों को टालने के लिए ही श्मशान तक पहुंचने के रास्ते सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने और श्मशानों से अतिक्रमण हटवाने का फैसला किया है। कई जगह श्मशानों की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, इस वजह से विवाद होते हैं।

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