जयपुर में प्रवासी भारतीय और सीडीयू (CDU) पार्टी के नेता संजीव शर्मा ने कहा- आज भारत और जर्मनी के संबंध आजादी के बाद के सबसे मजबूत दौर में हैं। जर्मनी भारतीय युवाओं के लिए रोजगार और करियर के नए अवसर खोल रहा है। शर्मा ने कहा- भारत के पास प्रतिभा है और जर्मनी को उसी प्रतिभा की जरूरत है। हमारी पार्टी भी चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा भारतीय वहां आएं और काम करें। भारत और जर्मनी के बीच बढ़ते रिश्तों, रोजगार के अवसरों और भारतीय युवाओं के भविष्य को लेकर जर्मनी में रह रहे प्रवासी भारतीय संजीव शर्मा ने बातचीत में यह कहा।
सवाल: भारत और जर्मनी के रिश्तों को किस नजरिए से देखते हैं?
संजीव शर्मा: अगर भारत और जर्मनी के रिश्तों की बात करें तो आज की तारीख में दोनों देशों के संबंध जितने मजबूत हैं, शायद पहले कभी नहीं रहे। भारत की आजादी के बाद से अब तक का यह सबसे बेहतर दौर है। जर्मन सरकार चाहती है कि दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हों। इसी दिशा में हम भी काम कर रहे हैं। आप देखिए, भारतीय छात्रों के लिए जर्मनी ने वीजा प्रक्रिया काफी आसान कर दी है। जॉब सर्च वीजा जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। दोनों देशों की सरकारें मिलकर कई कार्यक्रम चला रही हैं, जिनका सीधा फायदा भारतीय युवाओं को मिलेगा।
सवाल: जर्मनी में भारतीय युवाओं के लिए किस तरह की नौकरी के अवसर उपलब्ध हैं?
संजीव शर्मा: मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि जितने अच्छे अवसर आज जर्मनी भारतीय युवाओं को दे रहा है। उससे बेहतर मौका शायद कभी नहीं मिलेगा। जर्मनी में युवा पीढ़ी की बड़ी कमी है। दूसरी तरफ भारत में युवाओं की संख्या बहुत ज्यादा है, लेकिन रोजगार की चुनौती भी है। जर्मनी को पढ़े-लिखे और कुशल (Skilled) युवाओं की जरूरत है। वहां की सरकार चाहती है कि भारतीय युवा वहां जाकर काम करें। यह दोनों देशों के लिए विन-विन सिचुएशन है। मैं युवाओं से यही कहूंगा कि वे जर्मन भाषा सीखें, अपने कौशल को मजबूत करें और जर्मनी आने की तैयारी करें। वहां अच्छी सैलरी, बेहतर कार्य वातावरण और सुरक्षित भविष्य उनका इंतजार कर रहा है।
सवाल: किन-किन क्षेत्रों में रोजगार की सबसे ज्यादा संभावनाएं हैं?
संजीव शर्मा: अवसर लगभग हर क्षेत्र में हैं। सबसे ज्यादा मांग आईटी, हेल्थ सेक्टर, केयर टेकिंग, इंजीनियरिंग, प्लंबिंग और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में है। अगर बच्चे थोड़ी-सी भी मेहनत करें तो उनके लिए बहुत अच्छे अवसर हैं। अच्छी तनख्वाह मिलेगी और सुरक्षित भविष्य मिलेगा। इससे उनका और उनके परिवार का जीवन बेहतर हो सकता है।
सवाल: आप जर्मनी में सीडीयू पार्टी का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। राजनीतिक स्तर पर दोनों देशों के बीच किस तरह काम कर रहे हैं?
संजीव शर्मा: मैं सीडीयू (CDU) पार्टी का प्रतिनिधित्व करता हूं। मैं सीडीयू हैम्बर्ग का पहला भारतीय बोर्ड सदस्य हूं और पार्टी का डेलीगेट भी हूं। इसके अलावा भी कई जिम्मेदारियां निभा रहा हूं। मैं मानता हूं कि भारतीयों के लिए इससे बेहतर मौका नहीं हो सकता। इससे दोनों देशों को फायदा होगा। भारतीय परिवारों का भविष्य बेहतर होगा। भारत में विदेशी मुद्रा आएगी और जर्मनी को कुशल कार्यबल मिलेगा। जर्मनी अपनी तकनीक, अनुशासन और बेहतर कार्य संस्कृति के लिए दुनिया में जाना जाता है।
सवाल: आप राजस्थान और हरियाणा सरकार से भी मुलाकात करने जा रहे हैं। इसका उद्देश्य क्या है?
संजीव शर्मा: हमारी कोशिश है कि गर्वनमेंट-टू-गर्वनमेंट (G2G) स्तर पर समझौते हों। यदि राजस्थान सरकार और जर्मन सरकार मिलकर काम करें तो यहां के युवाओं को सीधा फायदा मिलेगा। हम हरियाणा और दूसरे राज्यों के साथ भी इसी तरह के प्रयास करेंगे। राजस्थान सहित कई राज्यों में रोजगार की चुनौती है। ऐसे में जर्मनी बेहतरीन अवसर बन सकता है। हम चाहते हैं कि दोनों सरकारें मिलकर ऐसा मॉडल तैयार करें, जिससे युवाओं को सीधे रोजगार के अवसर मिल सकें। इसी दिशा में हम लगातार काम कर रहे हैं।
सवाल: हरियाणा से जर्मनी तक का आपका सफर कैसा रहा?
संजीव शर्मा: जब मैं जर्मनी गया था, उस समय हालात बहुत कठिन थे। वीजा मिलना आसान नहीं था और सबसे बड़ी चुनौती जर्मन भाषा थी। आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। भारत में कई अच्छे संस्थान जर्मन भाषा सिखा रहे हैं। जयपुर में भी एफएलपी वर्ल्डवाइड नाम से संस्थान अच्छा काम कर रहा है। आज के बच्चों के पास ऑनलाइन सीखने की सुविधा है। अच्छे संस्थान हैं और बहुत ज्यादा अवसर हैं। जो संघर्ष हमें करना पड़ा। आज की पीढ़ी को उतना संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।
जर्मनी में नर्सेज के लिए साढ़े तीन लाख रुपए की सैलरी
जर्मन भाषा प्रशिक्षक जितेंद्र ने कहा- सबसे पहले मैं युवाओं से यही कहना चाहूंगा कि सही जानकारी और सही संस्थान का चुनाव करना बहुत जरूरी है। जर्मन भाषा सीखने के लिए अलग-अलग स्तर A1, A2, B1, B2 और C1 होते हैं। इनमें हर स्तर की अपनी उपयोगिता है और अलग-अलग नौकरियों के लिए अलग-अलग भाषा स्तर की आवश्यकता होती है। जर्मनी जाने से पहले यह भी जरूरी है कि छात्र मान्यता प्राप्त परीक्षा दें।
उन्होंने कहा- Goethe, OSD और Telc ये तीनों परीक्षाएं जर्मन कॉन्सुलेट की ओर से मान्य हैं। इसलिए इन्हीं परीक्षाओं की तैयारी करनी चाहिए। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विदेश में नौकरी दिलाने का अधिकार केवल उन्हीं संस्थानों या एजेंसियों को है, जिनके पास भारत सरकार के विदेश मंत्रालय का अधिकृत लाइसेंस हो। अगर कोई एजेंसी बिना MEA लाइसेंस के विदेश में नौकरी दिलाने का दावा करती है, तो वह पूरी तरह गलत है।
उन्होंने कहा- आज जर्मनी में रोजगार की संभावनाएं बहुत अधिक हैं। उदाहरण के लिए ड्राइवर बनने के लिए केवल A2 स्तर की जर्मन भाषा पर्याप्त है। इसी तरह प्लंबर और इलेक्ट्रीशियन जैसे तकनीकी क्षेत्रों में भी A2 स्तर की भाषा सीखकर रोजगार प्राप्त किया जा सकता है।
ड्राइवरों की सैलरी 2100 यूरो से 2700 यूरो हर महीने तक होती है। प्लंबर और इलेक्ट्रीशियन के लिए भी अच्छी सैलरी और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। हेल्थ सेक्टर की बात करें तो नर्स (Krankenpfleger) की जर्मनी में बहुत ज्यादा मांग है। वहां की आबादी तेजी से वृद्ध हो रही है, इसलिए हेल्थकेयर सेक्टर में लगातार कर्मचारियों की जरूरत बढ़ रही है।
नर्सिंग क्षेत्र में काम करने के लिए B2 स्तर की जर्मन भाषा अनिवार्य होती है। B2 पूरा करने के बाद उम्मीदवारों का सीधे प्लेसमेंट कराया जा सकता है। इस क्षेत्र में लगभग 3.5 लाख हर महीने तक की आय संभव है। इसके साथ टेम्पररी रेजिडेंस कार्ड (TRC) भी मिलता है, जो कुछ साल बाद स्थायी निवास की दिशा में मदद करता है।
