सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के न्यायिक अधिकारी अभय जैन से जुड़े मामले में दिए फैसले में कहा है कि गलत तरीके से नौकरी से हटाए न्यायिक अधिकारी को केवल इसलिए ‘सिलेक्शन स्केल’ और सुपर टाइम स्केल देने से मना नहीं कर सकते कि उस समय की एसीआर (एसीआर ‘एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट्स’) उपलब्ध नहीं थीं, जब वह नौकरी से बाहर था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियोक्ता खुद की गलती का फायदा नहीं ले सकता। इसलिए यदि एसीआर नहीं होने पर नियोक्ता जिम्मेदार है, तो अफसर के हक में ही बाकी बची एसीआर के आधार पर आंकलन किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह फैसला राजस्थान हाईकोर्ट की अर्ज़ी पर दिया।
अर्जी में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 15 मार्च, 2022 के फैसले पर स्पष्टीकरण मांगा था, जिसमें एडीजे अभय जैन को नौकरी से हटाने का आदेश रद्द करते हुए उन्हें सर्विस की निरंतरता, वरिष्ठता, सभी संबंधित फायदों और 50 फीसदी बकाया वेतन के साथ बहाल करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की मंशा को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित अवधि के दौरान जैन का एसीआर प्राप्त नहीं करना उन्हें गलत तरीके से नौकरी से हटाने का नतीजा था।
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जैन 16 जुलाई 2018 से ‘सिलेक्शन स्केल’ और 16 जुलाई 2021 से ‘सुपर टाइम स्केल’ के हकदार थे। वहीं हाईकोर्ट को निर्देश दिए कि वह तीन महीने में जैन की सैलरी को फिर से तय करने, सभी संबंधित फायदों को संशोधित करने और बकाया राशि का भुगतान करे। यह भी स्पष्ट किया कि फायदों की गणना उसके पहले के निर्देश के अनुसार की जाएगी, जिसमें पिछली सैलरी को 50% तक सीमित किया था। गौरतलब है कि अभय जैन को 2016 में हाईकोर्ट प्रशासन ने नौकरी से हटा दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के फैसले में जैन के पक्ष में फैसला देते हुए कहा था कि किसी न्यायिक अधिकारी को केवल गलत आदेश पारित करने के आधार पर नौकरी से नहीं हटा सकते। वहीं हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि उन्हें सभी परिलाभ के साथ बहाल किया जाए। बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर स्पष्टीकरण मांगा था।
