राजलदेसर
आथुणा बास वार्ड एक स्थित मां काली मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा वार्षिक महोत्सव के तहत दुर्गा मंदिर सेवा समिति के सहयोग से दुर्गा माता मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया गया। कथावाचक दंडी स्वामी शिवेन्द्राश्रम महाराज ने कहा कि इस धरती पर जब-जब पाप व अत्याचार बढ़ा है। भक्तों पर संकट आया है तथा धर्म की हानि हुई है। तब-तब भगवान ने किसी न किसी रूप में अवतार लिया है तथा पापियों व अत्याचारों का नाश कर अपने भक्तों की रक्षा कर फिर से धर्म की स्थापना की है। त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों से देवता, ऋषि-मुनि और समस्त प्रजा त्रस्त हो गई थी। तब भगवान विष्णु ने अयोध्या के महाराजा दशरथ के यहां श्रीराम के रूप में जन्म लेकर धर्म की पुनर्स्थापना का संकल्प लिया। भगवान श्रीराम श्रीराम का जीवन हमारे के लिए आदर्श है।
उन्होंने हमें मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा दी। अगर हम अपने आदर्शों को स्वयं में उतार ले, तो हमारी अधिकांश समस्याएं स्वत: समाप्त हो जाएगी। महाराज ने पुत्रेष्टि यज्ञ, महाराजा दशरथ को प्राप्त दिव्य खीर तथा माता कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम के जन्म का भावपूर्ण वर्णन सुनाया। कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, त्याग, सेवा और आदर्शों का प्रतीक है। उनके जीवन से प्रत्येक व्यक्ति को अपने माता-पिता, गुरु और समाज के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा मिलती है। श्रीराम जन्म का प्रसंग सुनाते समय पूरा पांडाल भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इससे पूर्व कथा के शुभारंभ पर यजमान दंपती मदन कुचेरिया आदि मौजूद रहे।
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