राजस्थान में महात्मा गांधी नरेगा (वीबी-जी रामजी) के संविदा कर्मचारियों का 15 दिन का सामूहिक बहिष्कार टल गया है। संविदा कर्मचारियों ने कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के आवास पर पहुंचकर नियमितीकरण की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने जल्द से जल्द सेवा नियमों को अंतिम रूप देकर नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सेवा नियमों की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही इसे पूरा कर नियमितीकरण का रास्ता साफ किया जाएगा। मंत्री के आश्वासन के बाद प्रदेशभर के मनरेगा संविदा कर्मचारियों ने प्रस्तावित 15 दिवसीय सामूहिक बहिष्कार को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है।
बेहद कम मानदेय पर कार्य कर रहे कर्मचारी प्रदेशाध्यक्ष दिनेश मीणा ने बताया- संविदा कर्मचारी पिछले करीब 20 वर्षों से बेहद कम मानदेय पर कार्य कर रहे हैं। वर्तमान महंगाई के दौर में इस मानदेय पर परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार जल्द नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करेगी।
विधि विभाग की अंतिम मंजूरी का इंतजार, जल्द साफ होगा रास्ता
मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि विधानसभा में भी इन कर्मचारियों के नियमितीकरण का आश्वासन दिया गया था। इस संबंध में वित्त विभाग को भेजा गया प्रस्ताव वित्त और कार्मिक विभाग से अनुमोदित हो चुका है। अब केवल विधि विभाग से पत्रावली (फाइल) का अनुमोदन होना शेष है। इसके बाद संविदा कर्मचारियों के नियमित होने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो जाएगा।
साल 2005 से शुरू हुआ सफर और अदालती अड़चनें
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि ग्रामीण विकास विभाग में साल 2005 से संविदा पर कार्यरत इन कर्मचारियों की नियुक्ति उस समय हुई थी, जब डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और उदयपुर में महात्मा गांधी नरेगा योजना का ट्रायल शुरू किया गया था। साल 2008 में योजना पूरे राजस्थान में लागू होने के बाद भी ये कर्मचारी संविदा पर ही सेवाएं देते रहे।
साल 2013 में बोनस अंकों के आधार पर नियमितीकरण के लिए भर्ती निकाली गई, लेकिन मामला हाईकोर्ट पहुंच गया और भर्ती पर रोक लग गई। इसके बाद साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जहां अनुभव अंकों के पक्ष में निर्णय आया। हालांकि, वर्ष 2017 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने एसएसआर भर्ती-2013 की विज्ञप्ति अपरिहार्य कारणों से वापस ले ली थी।नियमों का फेर और बजट सत्र में मंत्री की बड़ी घोषणा
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया- इसके बाद साल 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने ‘राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट्स रूल्स-2022’ लागू किए। वर्ष 2023 में विभिन्न विभागों के संविदा कर्मचारियों को इन नियमों के तहत एडॉप्ट (शामिल) किया गया। इसी आधार पर मनरेगा संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति भी जारी हुई, लेकिन सेवा नियमों को लेकर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया अटक गई।
ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पहले प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया, जहां से इसे पंचायती राज अधिनियम-1994 के तहत सेवा नियम बनाने की सलाह देकर वापस भेजा गया। बाद में पंचायती राज विभाग में भेजी गई पत्रावली पर विधि विभाग ने आपत्तियां लगा दीं। इसके बाद बजट सत्र के दौरान मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने नियम-309 के तहत नए सेवा नियम बनाकर कर्मचारियों के नियमितीकरण की घोषणा की थी।
3500 कर्मचारियों को भजनलाल सरकार से बड़ी उम्मीदें
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया- प्रदेशभर में मनरेगा (वीबी-जी रामजी) के करीब 3500 संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं। नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने पर इन सभी कर्मचारियों को इसका लाभ मिलने की पूरी संभावना है। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार पर भरोसा जताते हुए उम्मीद व्यक्त की है कि जल्द ही उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी।
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