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सांडवा कस्बे को रोज 2.5 एमएलडी नहरी पानी चाहिए, आधा भी नहीं मिल रहा, टैंकरों से काम चला रहे ग्रामीण

आपणी योजना द्वारा जरूरत के मुकाबले मात्र 30 प्रतिशत पानी मिलने के कारण कस्बे में पानी का संकट गहराने लगा है। गांव में महीने में मात्र दो से तीन बार ही केवल डेढ़-दो घंटे के लिए पीने के पानी की सप्लाई मिल रही है। ऐसे में मजबूरी में क्षेत्र की करीब 30 हजार की आबादी को टैंकरों से पानी खरीद कर काम चलाना पड़ रहा है। इसमें करीब 22 हजार सांडवा की आबादी व 8 हजार में बाहर से आने वाले विद्यार्थी, व्यापारी आदि शामिल हैं।

मानकों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति 55 लीटर तथा शहरी क्षेत्रों में 100 से 135 लीटर प्रतिदिन पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। ऐसे में सांडवा जैसे बड़े कस्बे को शहरी मानकों के अनुसार कम से कम 100 लीटर प्रति व्यक्ति पानी मिलना जरूरी है। सांडवा कस्बे की वर्तमान आबादी व अन्य बाहरी लोगों के निवास को देखते हुए रोज 2.5 एमएलडी नहरी पानी की आवश्यकता है, जबकि सांडवा नहर के टेल एंड में होने के कारण अभी 0.5 से .75 एमएलडी पानी मुश्किल से मिल पा रहा है। गांव में करीब चार हजार कनेक्शनों को 24 जोन में बांट कर पानी सप्लाई दी जाती है।

कस्बे में बीते करीब पांच साल से पानी की समस्या लगातार बढ़ रही है। आपणी योजना की लगातार सप्लाई नहीं आने व पूरा पानी नहीं मिलने के कारण सप्लाई की निर्भरता केवल ट्यूबवैल पर ही रहती है। गांव में सात ट्यूबवैल से पानी की सप्लाई हो रही है। इनमें से दो-तीन ट्यूबवैल ठीक स्थिति है, जबकि शेष में पानी का स्तर कम होने के कारण नाम मात्र की सप्लाई मिलती है।

ऐसे में गांव की अधिकांश आबादी पानी के टैंकरों पर ही निर्भर है। नहर के पानी की सप्लाई नहीं आने के बारे अधिकारियों से बात करते है, तो कभी रतनगढ़, कभी सरदारशहर पंप खराब हो जाने के कारण सप्लाई नहीं आने का हवाला दे दिया जाता है। इस संबंध में चार दिन पहले सांडवा में आए कलेक्टर अभिषेक सुराणा को जनप्रतिनिधियों ने नहर के पानी की सप्लाई को वर्तमान की जनसंख्या के अनुसार बढ़ा कर देने की मांग की थी। इधर, एईएन दिनेश मेहला का कहना है कि कस्बे में पेयजल सप्लाई को लेकर अलर्ट रहते हैं, लेकिन पीछे से पर्याप्त सप्लाई नहीं मिलने के कारण हम भी मजबूर हैं। निवर्तमान उप सरपंच शिवशंकर पारीक ने बताया कि वर्तमान में ग्राम पंचायत क्षेत्र में सात ट्यूबवैल चालू हालत में हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश का डिस्चार्ज बेहद कम हो चुका है। केवल दो-तीन ट्यूबवैल ही ठीक ठाक स्थिति में हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर ट्यूबवैल पुराने हो चुके हैं और इनके रखरखाव व मरम्मत की सख्त जरूरत है। पुराने ट्यूबवैल को दुरुस्त कराने के साथ ही क्षेत्र में 6 से 7 नए ट्यूबवैल करवाए जानी की आवश्यकता है। इसके अलावा दो से तीन नई टंकियां बनाई जाने तथा पुरानी पाइप लाइनों को बदलकर पूरे कस्बे को व्यवस्थित जोन में बांटा जाए, ताकि सप्लाई सुचारु हो सके। यहां स्थाई आबादी के अलावा बड़ी संख्या में बाहरी लोग, हजारों छात्र भी निवास करते हैं।

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