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कॉमेडी फिल्मों से हंसना चाहते हैं दोनों तरफ के लोग!:भारत-पाकिस्तान एक साथ हंसेंगे तो पूरा दक्षिण एशिया हंसेगा

क्या आप जानते हैं कि भारतीय गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ पाकिस्तान में शाहरुख खान से भी ज्यादा मशहूर हैं? दिलजीत सिख हैं और शाहरुख मुस्लिम। तो पाकिस्तान में एक सिख अभिनेता एक मुस्लिम अभिनेता से ज्यादा मशहूर क्यों है? इस सवाल का जवाब आपको भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्तों के बदलते डायनामिक्स के बारे में बताएगा।

पाकिस्तानी फिल्म “लीजेंड ऑफ मौला जट्ट’ इस महीने यानी अक्टूबर में भारत में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसकी रिलीज रोक दी गई है। खासकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने इसका विरोध किया था। उन्होंने भारत में इस पाकिस्तानी फिल्म को रिलीज करने के खिलाफ आंदोलन की धमकी दी थी। इस बीच मुझे भारतीय मीडिया में कुछ ऐसी स्टोरीज पढ़ने को मिली हैं कि जब 2019 से पाकिस्तान में बॉलीवुड फिल्मों पर बैन लगा हुआ है तो फिर भारत में एक पाकिस्तानी फिल्म के प्रदर्शन की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए?

मैं अपने पाठकों को बस इतना बताना चाहता हूं कि मैं आमतौर पर सिनेमा देखने नहीं जाता हूं, लेकिन हाल ही में मैंने अपनी बीवी, जो दिलजीत दोसांझ की बड़ी फैन हैं, के इसरार पर इस्लामाबाद के एक सिनेमाघर में भारतीय फिल्म “जट्ट एंड जूलियट 3’ देखी। गौर करने वाली बात यह है कि “लीजेंड ऑफ मौला जट्ट’ और “जट्ट एंड जूलियट 3’ दोनों ही पंजाबी भाषा की फिल्में हैं।

‘लीजेंड ऑफ मौला जट्ट’ एक पुरानी पंजाबी एक्शन फिल्म मौला जट्ट का रीमेक है, जो पहली बार 1979 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म के नायक सुल्तान राही को असल जिंदगी में डकैतों ने मार डाला था। इस फिल्म का नया वर्जन 2022 में रिलीज हुआ, जिसमें मुख्य किरदारों में फवाद खान और माहिरा खान हैं। दोनों ही पंजाबी भाषी नहीं हैं। उन्होंने सिर्फ उस फिल्म के लिए पंजाबी सीखी है।

लीजेंड ऑफ मौला जट्ट ने पहले ही पाकिस्तान, यूके, यूएसए, यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और मध्य पूर्व में अच्छा कारोबार किया है। इस फिल्म के निर्माता बिलाल लशारी से भारतीय पंजाब के कुछ फिल्म वितरकों ने संपर्क किया था। उन्हें लगा कि लीजेंड ऑफ मौला जट्ट ग्लेडिएटर का पंजाबी संस्करण है, इसलिए यह भारत में अच्छा कारोबार कर सकती है। लशारी ने उन्हें भारतीय पंजाब में फिल्म रिलीज करने के अधिकार भी दे दिए, लेकिन फवाद ख़ान और माहिरा खान की वजह से इस फिल्म को एमएनएस का विरोध झेलना पड़ा।

पाकिस्तान में भी ऐसे कई संगठन हैं जो “जट्ट एंड जूलियट 3’ जैसी भारतीय फिल्मों की अपने मुल्क में रिलीज पर आपत्ति जताते हैं, लेकिन उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया जाता रहा है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने हाल के दिनों में कई भारतीय पंजाबी फिल्मों की स्क्रीनिंग की अनुमति दी, क्योंकि वे कॉमेडी फिल्में थीं। दूसरी बात यह है कि ये फिल्में यूके में बनी थीं और इनमें कई पाकिस्तानी कलाकारों ने भी काम किया था। भारतीय पंजाबी फिल्मों में काम करने वाले लगभग सभी पाकिस्तानी कलाकार मशहूर हास्य कलाकार हैं।

यूके में बनने वाली पंजाबी बॉलीवुड फिल्मों में भारतीय और पाकिस्तानी कॉमेडी का बेहतरीन मिश्रण देखा जा सकता है। एक अहम तथ्य यह भी है कि पाकिस्तान की कुल आबादी का लगभग 53 फीसदी हिस्सा पाकिस्तानी पंजाब में बसता है और यहां के पंजाबी दिलजीत दोसांझ और पाकिस्तानी अभिनेताओं के बीच कॉमेडी कॉम्प्टीशन देखना चाहते हैं।

इसकी एक मिसाल बॉलीवुड फिल्म “बाबे भंगड़ा पौंदे ने’ है। इस मूवी में आप भारतीय अभिनेता दिलजीत दोसांझ और पाकिस्तानी अभिनेता सोहेल अहमद के बीच कॉमेडी कॉम्प्टीशन देख सकते हैं। यह फिल्म भारत और पाकिस्तान के बाहर बहुत हिट रही है और यूके से लेकर कनाडा तक पंजाबी दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया। सोहेल अहमद ने हाल ही में मुझे बताया कि एक कनाडाई सिख बॉलीवुड को टक्कर देने के लिए भारत और पाकिस्तान के अभिनेताओं के साथ हॉलीवुड में पंजाबी-अंग्रेजी फिल्म बनाने की योजना बना रहा है।

भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के खिलाफ कई फिल्में बनाई हैं। उन्होंने दोनों तरफ के अभिनेताओं के साथ भी फिल्में बनाईं और वे फिल्में बहुत हिट रहीं। रामचंद पाकिस्तानी (2008) भारतीय अभिनेत्री नंदिता दास के साथ पाकिस्तान में बनी थी। हमने फवाद खान और सोनम कपूर की भारतीय फिल्म ‘खूबसूरत’ (2014) भी देखी। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेद एक हकीकत है और हम अपने मसलों को सुलझाए बिना आगे नहीं बढ़ सकते। हमने पहले ही एक-दूसरे के खिलाफ कई जंग लड़ी हैं। दोनों तरफ ऐसे कई लोग हैं, जो अब भी एक-दूसरे के खिलाफ लड़ना चाहते हैं। उन्हें लड़ने देते हैं। लेकिन हमारे पास सीमा के दोनों तरफ ऐसे भी अनेक लोग हैं, जो एक साथ हंसना चाहते हैं। दोनों तरफ के कॉमेडियन हमें हंसा सकते हैं।

HIndustan kee jaan

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