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जयपुर में त्रिपोलिया बाजार स्थित विद्याधर का रास्ता इलाके की एक पुश्तैनी हवेली में करोड़ों का खजाना मिलने का दावा किया गया। खजाने में दबे सोने से भरे कलश और 45 किलो चांदी को खुर्द-बुर्द करने को लेकर पुलिस में रिपोर्ट दी गई है।

हवेली मालिक राहुल सेठी ने माणकचौक थाने मामला दर्ज कराया है। जिसमें बताया कि उनकी हवेली की खुदाई के दौरान ठेकेदार को खजाना मिला है, जिसे ठेकेदार और उसके साथियों ने करीब 40-45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14-15 कलश और 8 से 10 हजार पुराने चांदी के सिक्के आपस में बांट लिए। ठेकेदार ने दावा किया है कि उसके पास दो वीडियो हैं, जिनमें आरोपी यहां मिले खजाने की बात कर रहे हैं। हालांकि, खजाना मिलने के दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।

मामले की सच्चाई जानने के लिए भास्कर टीम त्रिपोलिया बाजार स्थित विद्याधर का रास्ता स्थित प्लॉट नंबर 630 पर पहुंची, जहां से खजाना मिलने और उसके गायब होने का मुकदमा दर्ज हुआ है। मौके पर चार मंजिला नया भवन बना मिला, जिसके बाहर फिनिशिंग का काम चल रहा था।

टीम ने हवेली मालिक राहुल सेठी से संपर्क करने का प्रयास भी किया, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। करीब 6 घंटे तक मौके पर पड़ताल के दौरान स्थानीय लोगों से बातचीत में कई अहम जानकारियां सामने आईं।

1970 के दशक के बड़े सेठ थे बद्रीनारायण सेठी

पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर एक स्थानीय निवासी ने बताया कि राहुल सेठी के दादा बद्रीनारायण सेठी 1970 के दशक में जयपुर और मुंबई के बड़े व्यापारियों में गिने जाते थे। उनके दादा अक्सर बताया करते थे कि उन्होंने बद्रीनारायण सेठी के यहां सोने-चांदी की ईंटें और अथाह धन-दौलत अपनी आंखों से देखी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार बद्रीनारायण सेठी मुंबई में “जीडी मावा वाला एंड कंपनी” नाम से मिठाई के बड़े कारोबारी थे और उनका व्यापार काफी फेमस था।

परिवार का व्यापारिक इतिहास

जानकारी के अनुसार बद्रीनारायण सेठी ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी से उनके बड़े पुत्र दुर्गालाल सेठी और दूसरी पत्नी से घनश्याम सेठी हुए। घनश्याम सेठी के दो पुत्र तरुण सेठी और राहुल सेठी हैं, जबकि दुर्गालाल सेठी के पुत्र अनिल सेठी हैं। पूरा परिवार लंबे समय से प्रतिष्ठित व्यापारिक परिवार के रूप में पहचाना जाता है।

स्थानीय लोगों ने भी खजाने की चर्चा की पुष्टि की

स्थानीय निवासी रामवतार बोहरा ने बताया कि उनका मकान सेठी परिवार की हवेली के सामने ही है। करीब एक साल पहले इस पुश्तैनी हवेली को तोड़ने का काम शुरू हुआ था। पहले यहां बहुत बड़ी हवेली थी, जिसे तोड़ने में लगभग चार से छह महीने का समय लगा। इसके बाद नया भवन बनाया गया। उन्होंने बताया कि इलाके में लंबे समय से चर्चा है कि हवेली की खुदाई के दौरान खजाना मिला था। उनका कहना है कि बद्रीनारायण सेठी आज के नहीं बल्कि आजादी से पहले के दौर के बड़े रईस थे और मुंबई में उनका बड़ा कारोबार था। ऐसे में लोगों को यह संभावना लगती है कि हवेली में कोई पुराना खजाना दबा हो सकता है। हालांकि उन्होंने भी स्पष्ट किया कि यह बातें सुनने में आई हैं और इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

विद्याधर के रास्ता का ऐतिहासिक महत्व

जिस इलाके में कथित खजाना मिलने का दावा किया गया है, उसका अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। जयपुर शहर के वास्तुकार पंडित विद्याधर शास्त्री के नाम पर इस मार्ग का नाम विद्याधर का रास्ता रखा गया था। यह क्षेत्र जयपुर के सबसे पुराने इलाकों में गिना जाता है और यहां कई ऐतिहासिक हवेलियां आज भी मौजूद हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार सेठी परिवार भी इस क्षेत्र के पुराने और समृद्ध परिवारों में शामिल रहा है।

राहुल सेठी ने रिपोर्ट में क्या लगाए आरोप

राहुल सेठी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी पुश्तैनी हवेली को तोड़कर नया भवन बनाने का ठेका डिवाइन-1 एलएलपी के माध्यम से दिया गया था। तोड़ाई का कार्य ठेकेदार महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू को सौंपा गया था। उन्होंने बताया कि कार्य शुरू होने से पहले ठेकेदार को साफ निर्देश दिए गए थे कि यदि भवन की नींव, दीवारों या मलबे से कोई कीमती वस्तु, पुरानी संपत्ति या धन मिले तो उसे परिवार को सौंपा जाएगा।

45 किलो चांदी, 15 स्वर्ण कलश और हजारों सिक्के मिलने का दावा

एफआईआर के अनुसार हवेली को तुड़वाने के दौरान करीब 40 से 45 किलो चांदी की सिल्लियां, सोने के सिक्कों से भरे 14 से 15 स्वर्ण कलश, 8 से 10 हजार पुराने चांदी के सिक्के और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं मिलीं। आरोप है कि ठेकेदार महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू पुत्र नेनूराम निवासी मंडी खटीकान मालियों का मोहल्ला ने अपने सहयोगियों अनुज, जगदीश, रजनी, रेहान, सुल्तान और पप्पू अजमेरा के साथ मिलकर यह पूरी संपत्ति मालिक को बताए बिना आपस में बांट ली और खुर्द-बुर्द कर दी।

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