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नीलगाय के दमदार तेवर देख भागा लेपर्ड ‘किंग राणा’:बिना लड़े पीछे हटा, झालाना में दोनों का आमना-सामना देख पर्यटक भी दंग रह गए

जयपुर के झालाना लेपर्ड रिजर्व में शनिवार शाम को जंगल की दुनिया का ऐसा दुर्लभ और रोमांचक दृश्य देखने को मिला, जिसने सफारी पर आए पर्यटकों को भी हैरान कर दिया। आमतौर पर अपने इलाके में दबदबा रखने वाले ‘किंग ऑफ झालाना’ के नाम से मशहूर नर लेपर्ड ‘राणा’ के सामने इस बार एक ताकतवर मेल ब्लू बुल (नीलगाय) पूरी तरह बेखौफ नजर आया। शिकारी और शिकार के बीच हुए इस अप्रत्याशित घटनाक्रम में आखिरकार राणा को ही पीछे हटना पड़ा। दरअसल, यह रोमांचक नजारा झालाना रिजर्व के एक वाटर पॉइंट पर देखने को मिला। जहां राणा वाटर पॉइंट के पास मौजूद था। तभी एक विशालकाय मेल ब्लू बुल वहां पहुंचा। लेपर्ड ‘राणा’ की मौजूदगी के बावजूद उसने न तो घबराहट दिखाई और न ही पीछे हटने की कोशिश की। वह पूरी शांति और आत्मविश्वास के साथ पानी पीता रहा, मानो वहां कोई शिकारी मौजूद ही न हो।

ब्लू बुल के इस बेखौफ रवैये को देखकर ‘राणा’ ने अपना रौब दिखाने की कोशिश की। उसने कई बार घुर्राकर और आक्रामक मुद्रा बनाकर अपने क्षेत्र का दबदबा जताने का प्रयास किया, लेकिन ब्लू बुल पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। पानी पीने के बाद उसने अपने लंबे और नुकीले सींग लहराते हुए सीधे राणा की ओर कदम बढ़ा दिए। सामने विशाल शरीर और मजबूत सींगों वाले प्रतिद्वंद्वी को देखकर राणा ने स्थिति का आकलन किया। कुछ पल तक दोनों आमने-सामने रहे, लेकिन हमला करने के बजाय राणा ने धीरे-धीरे पीछे हटना ही बेहतर समझा। जंगल के सबसे चर्चित शिकारी को इस तरह पीछे हटते देख सफारी में मौजूद पर्यटक भी दंग रह गए। सभी की निगाहें इस असाधारण मुकाबले पर टिकी रहीं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वाटर पॉइंट के आसपास मौजूद मोर और टिटहरी भी मानो इस रोमांचक दृश्य के मौन गवाह बने रहे।

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य परिस्थितियों में स्वस्थ और वयस्क मेल ब्लू बुल पर लेपर्ड हमला करने से बचते हैं। नीलगाय का विशाल आकार, वजन और उसके नुकीले सींग लेपर्ड के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। ऐसे में अनुभवी शिकारी अक्सर अनावश्यक जोखिम लेने के बजाय पीछे हटना ही बेहतर समझते हैं। इस पूरे दुर्लभ घटनाक्रम को वन्यजीव गाइड सीपी सैनी ने अपने कैमरे में कैद किया। उनका यह वीडियो अब वन्यजीव प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। यह दृश्य एक बार फिर साबित करता है कि जंगल में हमेशा शिकारी ही सबसे ताकतवर नहीं होता, बल्कि परिस्थितियां, अनुभव और सही समय ही असली बादशाहत तय करते हैं।

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