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प्रदेश स्तर पर हुए समझौते को नकारा, मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन जारी

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर किए जा रहे आंदोलन के तहत स्थानीय कार्यकर्ताओं ने प्रदेश स्तर पर किए गए समझौते को मानने से इनकार करते हुए रविवार को भी प्रदर्शन जारी रखा। ताल मैदान में प्रदर्शन कर रही कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने सरकार पर आंदोलन को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए तीन महीने के आश्वासन को अस्वीकार कर दिया।

कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर तत्काल व ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वे धरना-प्रदर्शन जारी रखेगी और इसके बाद ही आंगनबाड़ी केंद्र खोले जाएंगे। कार्यकर्ता सरोज कुल्हरि व कौशल्या रूहिल ने बताया कि सरकार ने चुनाव के समय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्थायी करने का वादा किया था, जो आज तक पूरा नहीं हुआ है। 25-25 वर्षों तक सेवा देने के बावजूद उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। सरकार महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन और प्रचार-प्रसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से करवाती है। इसके बदले केवल मानदेय देकर अपनी जिम्मेदारी निभा रही है।

उनकी मुख्य मांगों में सभी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना और प्रतिमाह 26 हजार रुपए वेतन देना शामिल है, जिसको लेकर समझौते में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष मंजू नाई का प्रदेश स्तरीय समझौते का समर्थन करने पर विरोध किया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि समझौता उनकी सहमति से नहीं हुआ है। ऐसे में वे इसे स्वीकार नहीं करती। अखिल भारतीय किसान सभा के रामकृष्ण छींपा ने भी आंदोलन का समर्थन किया। इस मौके पर ग्यारसी, सुमन हुड्डा, विनोद बैदा, कमलेश, रोशनी पूनिया, नीतू स्वामी, सपना, कौशल्या, बिमला आदि मौजूद रहीं।

विरोध जताने वाली कार्यकर्ताओं से समझाइश करेंगे : जिलाध्यक्ष मंजू नाई ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व की ओर से सरकार से वार्ता कर समझौता किया गया है। समझौते में सरकार ने तीन माह का समय मांगा है। प्रदेश नेतृत्व की ओर से ही आंदोलन को वापस लेने का निर्णय लिया गया है। कुछ स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समझौते का विरोध जता रही हैं, जिनको समझाइश की जाएगी।

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